Sunday, 16 October 2016

मृगतृष्णा


मन तो चंचंल होता है हम सब कुछ पाना चाहते है। सपने देखना भी आवश्यक है पर क्या हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए गलत रास्ता थी अपना लेना चाहिए ।हमारे सामने सदैव दो विकल्प होते हैं एक सच्चा और अच्छा रास्ता तो कठिन होता है पर ये रास्ता हमें सदैव खुशी प्रदान करता है क्योकि यह कडी मेहनत व प्रयास के बाद मिली सफलता और वास्तविक सफलता होती है । दूसरा रास्ता असान व शीघ्र मिलता है
सफलता आसमान छूने लगती है पर जल्दी ही मनुष्य गिर जाता है । आकांक्षा तो एक मृगतृष्णा है। यह  हमें विचलित करती है ।  हमारे मन में असंतेाष पनपने लगता है इसलिए सदैव जीवन का परिचय शाश्वत सत्य से कराने में सक्षम बने और जो भी काम करें उससे आपके परिवर का ,देश का मस्तक न झुके ।सब को खुशी मिले क्योंकि आप का जीवन केवल आप का नहीे है उस पर सबका हक है ।सब लोग आपसे जुडे हैं । खुशियाॅं ऐसी हों जिन पर गर्व हो

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