कविता ---लक्ष्य कवयित्रि......... आशा शर्मा
पंछी तुम उडे़, क्या तुम मंजिल तक पहुॅंच पाए ।।
क्या तुमने अपना लक्ष्य साधा ,
क्या तुमने अपने पंखों को तराशा ,
क्या तुमने मन में विश्वास संजोया ,
क्या तुमने दृडता का पान किया ,
पंछी तुम उडे़, क्या तुम मंजिल तक पहुॅंच पाए ।।
क्या तुमने अपना लक्ष्य साधा ,
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क्या तुमने मन में विश्वास संजोया ,
क्या तुमने दृडता का पान किया ,
पंछी तुम उडे़, क्या तुम मंजिल तक पहुॅंच पाए ।।
क्या तुमने अपनी क्षमताओं को जाॅंचा ,
क्या तुमने नए सपने देखे ,
क्या तुमने उन सपनों का एहसास किया ,
क्या तुमने नए मंजिलों का आगाज किया ,
पंछी तुम उडे़, क्या तुम मंजिल तक पहुॅंच पाए ।।
पंछी तुम विजय का शंखनाद करो ,
नइ्र्र मशालों को ज्वलंत करो ,
पछीं तुम मंजिल की तलाश में,बढे चलो, बढे चलो,।।
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