Sunday, 8 September 2019

बरगद का पेड़,


बरगद का पेड़,


मैं हूं एक बरगद का पेड़,
कभी आशियाना हुआ करता था,
तो कभी छाया राहगीर की,
मैं सदा तुम्हें धूप से बचाता था,
तो कभी बारिश से,
मैं हूं एक बरगद का पेड़।
कभी मेरी पूजा किया करते थे तुम,
तो कभी हमराज था तुम्हारा,
आज अपने स्वार्थ के लिए,
मुझे ही चाहते हो काटना तुम,
पर भूलो मत कि फिर कौन
बनेगा आशियाना तुम्हारा,
मैं हूं एक बरगद का पेड़।
कौन देगा छाया तुम्हें,
कौन बचाएगा बारिश से,
कौन बनेगा हमराज तुम्हारा,
मैं हूं एक बरगद का पेड़।।
Meri Nazar Se...

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