कहानी- रद्दी वाला
हम घरों में अक्सर अपने आसपास सुबह के समय आवाज सुनते हैं रददीवाला ।हम अक्सर उन पर अपना ध्यान नहीं देते । हमें रद्दी बेचनी है तो बुलाते हैं और बेज देते हैं । इसके इलावा हमारा उनके साथ कोई संबंध नहीं होता है। वह भी गलियों- गलियों में जाते हैं ।अपना काम करते हैं । अक्सर मैंने यह सुना है उनका उतना अस्तित्व लोग महसूस नहीं करते परंतु बहुत सारी घटनाएं हम अपने आसपास देखते हैं। कभी-कभी तो हम देखते हैं कोई -कोई रददीवाला के पास इतना पैसा होता है कि वह जीवन की सारी सहूलियतें उसके पास होती हैं परंतु जो बेचारे गलियों में साइकिल पर रद्दी खरीदते हैं उनका जीवन बहुत ही कष्टदायक होता है और अक्सर वह बहुत मायूस व ऐसे ही चेहरा उनका दिखाई पड़ता है । मुझे एक घटना याद आ रही है कि हमने अपना घर दूसरी जगह बदला था। नया घर खरीदा था। अक्सर जब हम नए घर में जाते हैं तो सामान पूरा सेट करने के बाद हमारे पास बहुत सारी रद्दी इकट्ठी हो जाती है । इसलिए हमारे पास भी बहुत सारी रद्दी इकट्ठी हो गई थी। मैंने सोचा क्यों ना अब यह फालतू का सामान रद्दी वाले को दे दिया जाए। अगली सुबह मैंने एक रद्दी वाले की आवाज सुनी । मैंने उसे बुलाया और मेरे हस्बैंड को मैंने बोला इसे रद्दी दे दीजिए ।उन्होंने उसे आवाज लगाई और वह हमारे घर आया । जैसे ही हम ने दरवाजा खोला उसने गुड मॉर्निंग साहब बोला और उसने रद्दी की अलग-अलग चीजों की अलग-अलग कीमत बताइ। रद्दी तोलेने के बाद पैसे देने के बाद वह बोला साहब नये आए हैं इस जगह में । मेरे हस्बैंड ने कहा हां हम कुछ दिन हुए हैं यहां आए हुए। बस इतना संक्षिप्त विवरण दोनों के बीच में था। उसने जल्दी से अपनी रद्दी अलग-अलग झोलों में इकट्ठी की और नमस्ते साहब कहते हुए वह चला गया। उसके बाद अक्सर हम लोग जब भी सुबह कहीं जा रहे होते थे। अक्सर हमें टकराता था और हमेशा ऐसे देखता और स्माइल गुड मॉर्निंग साहब ऐसे बोला भी करता था। हम लोग उतना ध्यान नहीं देते थे। गुड मॉर्निंग का जवाब देकर हम लोग निकल जाते थे । कुछ महीनों के बाद मेरे हस्बैंड का एक्सीडेंट हो गया था और वह 6 महीने तक घर से बाहर नहीं निकल पाए। एक्सीडेंट के कुछ दिनों बाद मैं जब घर से निकली मेरा और उसका आमना-सामना हुआ ।उसने अपनी साइकिल रखी और मुझसे कहा" मैडम बहुत दिन से साहब नहीं दिखाई दे रहे हैं" ठीक तो है वह। मुझे यह प्रश्न थोड़ा अचंभित करने वाला था कि बताओ यह ऐसा भी ध्यान रखता है क्या ? मैंने बोला हां साहब गिर गए थे ।उन्हें चोट लगी है। इतना कहकर मैं अपने काम पर चली गई और थोड़ा मुझे अच्छा भी लगा कि देखो इंसान कितना अच्छा है । अपने काम के लिए इस तरह का व्यवहार भी रखता है और फिर एक दिन वह हमारे घर आया । उसने मेरे हस्बैंड से उनका हालचाल पूछा और पूछा 'साहब कैसे हैं आप' और बहुत दिनों से आपको नहीं देखा था।मुझे अच्छा नहीं लग रहा था तो मुझे मैडम से पता चला कि आप की तबीयत ठीक नहीं है। मेरे हस्बैंड ने उससे शुक्रिया कहा और वह वहां से चला गया। उसके बाद
हम लोग काफी समय के बाद बाहर निकलने लगे हम लोग जा रहे थे तो उसने एकदम अपना साइकिल रोका और ऐसे हाथ दिखाया। हम लोग कार में थे हमने अपनी कार रोक दी और वह हमारे नजदीक आया और बोला साहब अब आप कैसे हैं। बहुत दिनों के बाद आप को देख कर बहुत अच्छा लग रहा है। साहब मैंने आपको रोका और आपको तकलीफ थी। उस के लिए क्षमा चाहता हूं ।बहुत दिनों बाद आप को देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा गुड मॉर्निंग किया। मेरे हस्बैंड ने उसका शुक्रिया अदा किया और वह चला गया।उस बंदे ने हमारा मन मोह लिया उसमें इतना सलीका है। इतना अजनबी होने के बाद भी उसमें वह अपनापन हमें दिखाई दिया। यह होती है मनुष्य की अच्छाई कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता ।पैसे से कोई अच्छा या बुरा नहीं हो सकता। हमारे गुण मन के अंदर से आते हैं जो किसी भी हालत में उन गुणों को हम छोड़ नहीं पाते। यह तो मनुष्य का व्यवहार ही होता है जो हमें एक-दूसरे के साथ जोड़ता है ।अजनबी होते हुए भी वह हमें अपने से लगने लगते हैं । उसके बाद हम अक्सर जब भी घर से बाहर निकलते थे हमारा आमना-सामना होता ही था और हमेशा वह हमें गुड मॉर्निंग किए बगैर नहीं रहता था और हम भी उसके चेहरे को देखकर प्रसन्न होते हैं । यह हमारा एक अजीब सा रिश्ता बन गया था। यह ऐसा रिश्ता था जो एक एहसास से भरा हुआ था।
Meri Nazar Se......
हम घरों में अक्सर अपने आसपास सुबह के समय आवाज सुनते हैं रददीवाला ।हम अक्सर उन पर अपना ध्यान नहीं देते । हमें रद्दी बेचनी है तो बुलाते हैं और बेज देते हैं । इसके इलावा हमारा उनके साथ कोई संबंध नहीं होता है। वह भी गलियों- गलियों में जाते हैं ।अपना काम करते हैं । अक्सर मैंने यह सुना है उनका उतना अस्तित्व लोग महसूस नहीं करते परंतु बहुत सारी घटनाएं हम अपने आसपास देखते हैं। कभी-कभी तो हम देखते हैं कोई -कोई रददीवाला के पास इतना पैसा होता है कि वह जीवन की सारी सहूलियतें उसके पास होती हैं परंतु जो बेचारे गलियों में साइकिल पर रद्दी खरीदते हैं उनका जीवन बहुत ही कष्टदायक होता है और अक्सर वह बहुत मायूस व ऐसे ही चेहरा उनका दिखाई पड़ता है । मुझे एक घटना याद आ रही है कि हमने अपना घर दूसरी जगह बदला था। नया घर खरीदा था। अक्सर जब हम नए घर में जाते हैं तो सामान पूरा सेट करने के बाद हमारे पास बहुत सारी रद्दी इकट्ठी हो जाती है । इसलिए हमारे पास भी बहुत सारी रद्दी इकट्ठी हो गई थी। मैंने सोचा क्यों ना अब यह फालतू का सामान रद्दी वाले को दे दिया जाए। अगली सुबह मैंने एक रद्दी वाले की आवाज सुनी । मैंने उसे बुलाया और मेरे हस्बैंड को मैंने बोला इसे रद्दी दे दीजिए ।उन्होंने उसे आवाज लगाई और वह हमारे घर आया । जैसे ही हम ने दरवाजा खोला उसने गुड मॉर्निंग साहब बोला और उसने रद्दी की अलग-अलग चीजों की अलग-अलग कीमत बताइ। रद्दी तोलेने के बाद पैसे देने के बाद वह बोला साहब नये आए हैं इस जगह में । मेरे हस्बैंड ने कहा हां हम कुछ दिन हुए हैं यहां आए हुए। बस इतना संक्षिप्त विवरण दोनों के बीच में था। उसने जल्दी से अपनी रद्दी अलग-अलग झोलों में इकट्ठी की और नमस्ते साहब कहते हुए वह चला गया। उसके बाद अक्सर हम लोग जब भी सुबह कहीं जा रहे होते थे। अक्सर हमें टकराता था और हमेशा ऐसे देखता और स्माइल गुड मॉर्निंग साहब ऐसे बोला भी करता था। हम लोग उतना ध्यान नहीं देते थे। गुड मॉर्निंग का जवाब देकर हम लोग निकल जाते थे । कुछ महीनों के बाद मेरे हस्बैंड का एक्सीडेंट हो गया था और वह 6 महीने तक घर से बाहर नहीं निकल पाए। एक्सीडेंट के कुछ दिनों बाद मैं जब घर से निकली मेरा और उसका आमना-सामना हुआ ।उसने अपनी साइकिल रखी और मुझसे कहा" मैडम बहुत दिन से साहब नहीं दिखाई दे रहे हैं" ठीक तो है वह। मुझे यह प्रश्न थोड़ा अचंभित करने वाला था कि बताओ यह ऐसा भी ध्यान रखता है क्या ? मैंने बोला हां साहब गिर गए थे ।उन्हें चोट लगी है। इतना कहकर मैं अपने काम पर चली गई और थोड़ा मुझे अच्छा भी लगा कि देखो इंसान कितना अच्छा है । अपने काम के लिए इस तरह का व्यवहार भी रखता है और फिर एक दिन वह हमारे घर आया । उसने मेरे हस्बैंड से उनका हालचाल पूछा और पूछा 'साहब कैसे हैं आप' और बहुत दिनों से आपको नहीं देखा था।मुझे अच्छा नहीं लग रहा था तो मुझे मैडम से पता चला कि आप की तबीयत ठीक नहीं है। मेरे हस्बैंड ने उससे शुक्रिया कहा और वह वहां से चला गया। उसके बाद
हम लोग काफी समय के बाद बाहर निकलने लगे हम लोग जा रहे थे तो उसने एकदम अपना साइकिल रोका और ऐसे हाथ दिखाया। हम लोग कार में थे हमने अपनी कार रोक दी और वह हमारे नजदीक आया और बोला साहब अब आप कैसे हैं। बहुत दिनों के बाद आप को देख कर बहुत अच्छा लग रहा है। साहब मैंने आपको रोका और आपको तकलीफ थी। उस के लिए क्षमा चाहता हूं ।बहुत दिनों बाद आप को देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा गुड मॉर्निंग किया। मेरे हस्बैंड ने उसका शुक्रिया अदा किया और वह चला गया।उस बंदे ने हमारा मन मोह लिया उसमें इतना सलीका है। इतना अजनबी होने के बाद भी उसमें वह अपनापन हमें दिखाई दिया। यह होती है मनुष्य की अच्छाई कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता ।पैसे से कोई अच्छा या बुरा नहीं हो सकता। हमारे गुण मन के अंदर से आते हैं जो किसी भी हालत में उन गुणों को हम छोड़ नहीं पाते। यह तो मनुष्य का व्यवहार ही होता है जो हमें एक-दूसरे के साथ जोड़ता है ।अजनबी होते हुए भी वह हमें अपने से लगने लगते हैं । उसके बाद हम अक्सर जब भी घर से बाहर निकलते थे हमारा आमना-सामना होता ही था और हमेशा वह हमें गुड मॉर्निंग किए बगैर नहीं रहता था और हम भी उसके चेहरे को देखकर प्रसन्न होते हैं । यह हमारा एक अजीब सा रिश्ता बन गया था। यह ऐसा रिश्ता था जो एक एहसास से भरा हुआ था।
Meri Nazar Se......
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