Sunday, 19 January 2020

घर में खुशनुमा माहौल देना व नंबरों का दबाव न होना

 आर्टिकल नंबर -2

सभी बच्चों के एग्जाम आ रहें हैं ।जैसे ही एग्जाम आते हैं सभी अभिभावक व अध्यापक उन बच्चों के पीछे पड़ जाते हैं और उनको दबाव देने लगते हैं ।पढ़ाई का ,नंबरों का, तुलना करने लग जाते हैं कि दूसरे बच्चे इतने नंबर लाते हैं। तुम क्यों नहीं ला सकते ? या यह मत करो ,वह मत करो, पढ़ाई करो बिल्कुल भी नहीं यह सब ताने या यह सब परिस्थितियां उनके सामने मत लाइए। केवल इतना कीजिए कि बच्चों को अपने साथ लेकर बैठे उन्हें बताएं कि पढ़ाई की तैयारी कैसे करनी है । घर में बिल्कुल भी किसी प्रकार का दबाव उन पर ना डालें ।उनके साथ रहे उन्हें अच्छा माहौल प्रदान करें। उनकी सहायता करें चीजों को समझने में यदि कोई कठिनाई आती है तो ना स्वयं टेंशन में आए ना उन्हें टेंशन दे।उनके साथ उस कठिनाई को दूर करने में उनकी मदद करें और अध्यापकों का कर्तव्य है कि जो चीजें उनको समझ में नहीं आई है। उन्हें बहुत ही सरल और मधुर भाषा में उन बच्चों को समझाने का प्रयास करें ।बच्चों को इस समय प्यार की संवेदना की सबसे ज्यादा जरूरत होती है क्योंकि हम सभी माता-पिता यह समझते हैं कि केवल हमें ही उनके पास या फेल होने की चिंता होती है पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। उनमें भी यह चीजें होती हैं हम समझ नहीं पाते वह अपने हिसाब से तैयारियां करनी शुरू करते हैं पर यदि हम उनके साथ नहीं रहते तो कहीं ना कहीं वह लापरवाह हो जाते हैं । अगर वह सही तरीके से काम नहीं कर पा रहे हैं तो हमें और ज्यादा उनका ध्यान देना है ना कि उन्हें बुरा भला कह कर उन्हें और भी परेशानियों से युक्त कर दें । इससे वह  पढ़ाई नहीं कर पाते इसलिए एग्जाम्स के दिनों में स्पेशली उन पर कभी भी किसी भी प्रकार का दबाव ना देकर, उन्हें अच्छा वातावरण प्रदान करें खुशनुमा वातावरण सबसे जरूरी है।  प्यार की इस समय उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत है । उनकी कमियों को भी उनकी मजबूतियां बनाने में मदद कीजिए तो वह रिजल्ट हमें उनके चेहरे पर दिखने लगता है और इससे उनका आत्मविश्वास ही उन को सफल बनाने में कहीं ना कहीं योगदान देता है। हमें उन पर विश्वास होना चाहिए । जरूरी नहीं कि हर बच्चा 99% मार्क्स लाए तो ही वह इंटेलिजेंट होता है बिल्कुल भी नहीं बच्चा अपने बौद्धिक स्तर पर जितना कर सकता है। उतना आवश्य करता है और जो बच्चे कम मार्क्स लाते हैं वह किसी दूसरे सिकल्स में बहुत ज्यादा इंटेलिजेंट होते हैं। जिनको बाकी बीट नहीं कर सकते । हमें उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा। यह नहीं कि हम एक साथ उनको बोले 10 कदम एक साथ लेना क्योंकि हमने उन्हें पहले ध्यान नहीं दिया यह समय बहुत ही नाजुक होता है इसलिए उन्हें खुश रखें और उन्हें यह महसूस करवाएं कि हर परिस्थिति में हम उनके साथ हैं और किसी बात की उसे चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
Meri Nazar Se.......

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