Sunday, 9 February 2020

दर्द

 

दर्द
जब दर्द दिल में होता है,
तभी तो दिल रोता है,
वो सारे पल याद आते हैं,
जो आंखों को रूलाते हैं
तभी याद आती हैं लोगों की मकारियां।

जब दर्द दिल में होता है,
तभी तो दिल रोता है।

वो आॉऺखों के कोरों का
अन्यास ही भीग जाना,
सोते हुए भी आंखों का नम हो जाना,
दिल की धड़कनों का यूं ही  बढ जाना,
हर समय डर का अहसास  मन में भर जाना।

जब दर्द दिल में होता है,
तभी तो दिल रोता है।

उनके दुख में स्तंभ थे हम,
वो तो हमारा फर्ज करार दिया,
हमारे दुख में तो हम ही गद्दार निकले
इसको इश्तिहार ही बना डाला,
हमें कमजोर व निकम्मा मान लिया।

जब दर्द दिल में होता है,
तभी तो दिल रोता है।

महफिलें हर तरफ सुनी थी हमारी,
सब ने अकेला छोड़ दिया,
सब डरते थे बात करने से हमसे,
कहीं वो भी बदनाम न हो जाएं,
बचकर निकलते थे हम से।

जब दर्द दिल में होता है,
तभी तो दिल रोता है।

नासमझ ,भावुक व कमस्तर,
दिखाने थे लगे हमें लोग,
अपना लोहा मनवाने के लिए,
हमारे वजूद को ही मिटाना चाहते थे,
असुरक्षित महसूस करवाते थे हमें।

जब दर्द दिल में होता है,
तभी तो दिल रोता है।

 कभी-कभी हीरे को पत्थर समझते हैं लोग,
  पत्थर को हीरा भी  दिखाते हैं लोग,
 पर सूरज की रोशनी को बादलों में,
 छुपा सकता है क्या कोई ,
 हम गिरते हैं तो फिर उठते हैं,
 पर उन आंसूओं को भूल नहीं पाते,
 जो  दर्द में छलके थे कभी।

जब दर्द दिल में होता है,
तभी तो दिल रोता है।

न ही भूल पाते उन लोगों को जो,
 नजरअंदाज करते हैं हमें कभी,
 बस इक विश्वास है उस ईश्वर पर,
 जो सजाएं देता है ऐसे लोगों को,
 रहमत बरसाता है सच्चे लोगों पर।

जब दर्द दिल में होता है,
तभी तो दिल रोता है।।

Meri Nazar Se....

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