Sunday, 5 April 2020


दर्द का रिश्ता।

एक दिन मैं अपने रसोईघर में काम कर रही थी ।मैं बड़ी तन्मयता से अपने काम में जुटी थी । तभी मुझे बाहर कुछ आवाजें सुनाई थी जैसे कुछ जानवर चिल्ला रहे हो मुझे यह आवाज सूअर की सुनाई थी। जो बहुत जोर जोर से चिल्ला रहा था मैं तुरंत ही बाहर गई और मैंने सोचा देखूं यह क्यों चिल्ला रहा है बाहर निकलते ही मैंने देखा कि कुछ लोग आठ-दस लोग 4-5 सूअर को पकड़ रहे हैं। उन पर अपना जाल फेंक रहे हैं । मैं ऊपर से चिल्लाई कि यह तुम क्या कर रहे हो क्यों इन जानवरों को परेशान कर रहे हो और तुम कौन हो, जो इस तरह से इन को पकड़ रहे हो वह आठ 10 लोग एक साथ इकट्ठे हो गए और बोले मैडम आप अंदर जाइए। मैंने बोला मैं बिल्कुल भी अंदर नहीं जाऊंगी तुम इन जानवरों को छोड़ो । वह बोलने लगे नहीं मैडम हम इनको ले जाकर हम एक जगह पर रखेंगे और इनको खाना पानी देंगे । मैंने बोला अपना कार्ड दिखाओ और इतनी बेदर्दी से तुम उसको बांध रहे हो । तुमको थोड़ा भी दया नहीं आ रही और वह बेचारा बेजुबान प्राण इतनी जोर से दर्द में करहा रहा है यह कौन सा तुम्हारा काम  है जो तुम इन्हें तकलीफ दे रहे हो। जब तक , मैं क्या करूं मुझे समझ में नहीं आ रहा था पर मैं अंदर से बहुत परेशान हो रही थी इतनी देर में ही उन्होंने एक सूअर के हाथ पर बांधने शुरू कर दिए तो मुझे बहुत ही गुस्सा आया क्योंकि वह सूअर बिचारा छटपटा रहा था मैंने उनको धमकी दी रुको मैं अभी पुलिस को बुलाती हूं तब तुम्हारा सच और झूठ सामने आ जाएगा और मैंने तुरंत जोर से आवाज लगाई ।अंदर से कि मेरा फोन लेकर आओ। पुलिस को फोन लगाओ। अति जोर-जोर से चिल्लाने पर और लोग भी बाहर आए और वह तुरंत वो लोग वहां से भाग गए। मुझे ऐसा लगता है कि वह उनको ले जाकर कुछ तो गलत करने वाले थे। पर उनके जाने के भी काफी देर तक मुझे उस सूअर की आवाज सुनाई दे रही थी। उसकी तडप दिखाई दे रही थी ।मेरा मन काफी देर अस्त व्यस्त हो रहा था।जबकि उस प्राणी से मेरा दूर-दूर तक कोई भी नाता नहीं था पर यह दर्द क्यों हुआ यह बात मुझे समझ में नहीं आयी बस केवल एक ही बात समझ में आई कि हमें सब के दर्द का एहसास होना बहुत जरूरी होता है वरना यह जीवनभी  क्या जीवन है।
Meri Nazar Se...

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